महादेव शंकर त्रिपुरारी।।
नीलकंठ रुद्र गंगाधारी।।1।।
जटा जूट शशि, शोभित माथा।।
कटि बाघम्बर, डमरू हाथा।।2।।
नगेश अधिपति नाथ दयाला।।
कंठन साजे भुजंग माला।।3।।
नंदी वाहन गिरीश सुहाए।।
महाकाल देह भस्म रंगाए।।4।।
आदि कैलाश, डमरू बाजे।।
आदि शंकर, तांडव नाचे।।5।।
भगीरथ तप, नाथ मनभाया।।
गंगा मुक्त करी जगत तारा।।6।।
आदि देव, हालाहल पीना।।
महात्रासन जग रक्षा कीना।।7।।
जो नर भजे, शिवा केदारा।।
कष्ट हरे हो भवसागर पारा॥8।।
प्रभु आशुतोष चित भक्ति भाये।।
भक्तन पर बहु कृपा बरसाये।।9।।
भक्त वत्सल हैं अडिग तू जाना।।
त्रिनेत्र महेश शिव भगवाना।।10।।
@ बलबीर राणा 'अडिग'