शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

बच्चे


तब काख नीचे थे अब कंधे से ऊपर हो गए।
सच में तब मासूम थे बच्चे, अब मस्त हो गए।

वे बढ़ते चंद्र चरण में हम घटते चरण निहार रहे
रस भरे उन्मुक्त मधु मास में जीवन बिहार रहे
कांधे पर बिठा कर मेले की भीड़ दिखाता था जिन्हें
वे आज भीड़ से हाथ पकड़ खींचने वाले हो गए।
सच  में तब मासूम थे बच्चे, अब मस्त हो गए।

बीज माली-मालिन की अभिलाषा तृप्त कर गए
बगिया में अकुंर दे जीवन की आश जगा गए
प्रेम की छांव में सींचे अंकुर, चुल-बुल पौधे थे कभी
तब हाथ देती थी बेलें अब ठंगरों से ऊपर हो गए।
सच में तब मासूम थे बच्चे, अब मस्त हो गए।

बिस्तर की वो उछल-कूद अब छलांगे हो गए
छुपन छुपाई वाले छुपके बात करने वाले हो गए
तोतली जिद्द से घोड़े बनाने वाले नन्हे बादशाह
अब सबल-संभल के लगाम संभालने वाले हो गए
सच में तब मासूम थे बच्चे, अब मस्त हो गए।

जब तक थे पिताजी वर्षफल हमारा पूजते रहे
हमारी खुशी में वे अपना पूजना भूल गए
आज हमारा भी त्यौहार बन गया पूतों का जन्म दिन
इस खुशी में हम भी अपना मनाना भूल गए।
तब काख नीचे थे अब कंधे से ऊपर हो गए।
सच में तब मासूम थे बच्चे, अब मस्त हो गए।

ठंगरे = बेल को सहारा देने वाली टहनियां
25 अगस्त 2017
बेटे संजू के 17वें जन्म दिवस पर
@ बलबीर राणा अडिग

बुधवार, 16 अगस्त 2017

उम्र के दिये


तेल बाती का किरदार
निभाते-निभाते
इस आश में
उम्र गुजर जाती है कि
एक लौ बन सकें
और वह लौ
रोशन कर सके
उस आशियाने को
जिसमें गृहस्त रहता है।

@ बलबीर राणा 'अडिग'

गौरव गान


सहस्र कंठों की एक ही गूँज एक ही तान
कदम मिला के गा रहे तेरा गौरव गान
कश्मीर से कन्याकुमारी सबकी एक पहचान
जय हो भारत विशाला जय हो मेरा देश महान।

चमक रहा है भाल तेरा उतुंग हिमालय पर
उन्नत सीना फूल रहा है गंगा के तीरों पर
 एकता का फलक चमकाते पठार और मैदान
जय हो भारत विशाला, जय हो मेरा देश महान

पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण हर रंग की पाती है
सप्तरंगी भेष-भूषा बिलग पंथ और जाती है
ध्वज उठाये तिरंगा लहराये सबका एक है निशान
जय हो भारत विशाला, जय हो मेरा देश महान।

उदर साधना सिंचित करते देव वसुधर किसान
देश क्षितिज पर मुस्तैद बैठा हमारा बीर जवान
 सुख शांति पर ना, कोई पर मारे, रखना इतना ध्यान
जय हो भारत विशाल जय हो मेरा देश महान।

समग्र विजय रथ ले चले जो, उद्योग धंधे हैं
कर्मसाधना लीन यति वे भारत माँ के बंदे हैं
 कर्म बीरों का लोहा मान रहा आज सारा जहान
जय हो भारत विशाला जय हो मेरा देश महान।

15 अगस्त 2017
रचनाकार:- बलबीर राणा 'अडिग'


कृष्ण वंदना



देवकी वसुदेव नन्दन कृष्ण चंद वंदनम
धरा सुशोभितम अभिनन्दनम गोबिन्दम।

घोर घटा श्रावणी स्याह रात्रि आगमनम
जगदीशश्वरम विष्णु बिपुलं श्याम सुंदरम
मोर मुकुट मुरलीधर चंचल मृदु चपलम
सहस्र वन्दन हे सारथी यशोदा-नन्द नन्दनम
धरा अति सुशोभितम अभिनन्दनम गोबिन्दम।

पावन बाल चरित नटखट गोकुल धामम
गोपीयों संग रांस रचित प्रीत वृन्दाबनम
कृत्य अचंभितम महा मायावी पूतना बधम
इन्द्र दम्भम चूर-चूरम हाथ धरि गोवर्धनम
धरा अति सुशोभितम अभिनन्दनम गोबिन्दम

पीताम्बर कण्ठ वैजयन्ती स्वर्ण कुंडल शोभितम
अधर मधुर मुरली हस्त विराजे चक्र सुदर्शनम
काली नाग नथनम कंस काल कवलितकम
धरा शुचि संकल्पम प्रभु दहन पाप नाशकम
धरा अति सुशोभितम अभिनन्दनम गोबिंदम।

स्वर्णिम उषा सुखद निशा बृज भूमि आनंदम
तिमिर लोप, जहां विराजे कण-कण राधेश्वरम
हर मन-हृदय वसियो यशोदा श्यामा सुकोमलम
राधा रुकमणी दिल हरणम योगेश्वर बृजभूषणम
धरा अति सुशोभितम अभिनन्दनम गोबिन्दम।

अद्वितीय बलम पांडव दलम रण महाभारतम
पार्थ सारथी कुशल नेतृत्वम युद्धम कुरुक्षेत्रम
गीता अमृतम अमूर्त पवित्रम मनु आजीवनम
सर्वत्र व्याप्त प्राणी-प्राण, भूत-भविष्यम केशवम
धरा अति सुशोभितम अभिनन्दम गोबिन्दम।

सद मति दे हे महांबाहो उत्थान दे सर्वेश्वरम
ज्ञान क्षशु प्राकाश दे सद्भाव वत्स वत्सलम
हिन्द सुत कर्म प्रधान हो सुर-शोर्य आत्मबलम
रक्ष दक्ष परिपूर्ण सुपुष्ठम जग श्रेष्ठ हो भारतम
धरा अति सुशोभितम अभिनन्दम गोबिन्दम।

रचियता:- बलबीर राणा 'अडिग'