चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे,
हौले-हौले, घनेरे-सनेरे।
नयन-नक्श, वक्त बसेरे,
हेर-फेर होते सांझ-सबेरे...
जो बीता, वही गीता,
आगे क्या? सब रीता।
सुख भोगा, दुःख झेला,
कुछ हारे, कुछ जीता।
उकाळ उंदार संग चलेरे।
चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे...
धूप-छाँव, काँव-काँव,
ना जानी चाल, ना दाँव।
बजते-बजाते, धै-धध्याते,
बढ़ते रहे, डग मिला पाँव।
सौजि-सौजी, धीरे-धीरे।
चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे....
हार-जीत, जीवन-गीत,
थोड़ी-सी कम, बड़ी धीत।
जतन जगाते, ठौर ठैराते,
रचते रहे जीवन-संगीत।
घुघता-घुघती, घुर्र-घुर्र,
खुले रहे, मन-ज्यू के डेरे।
चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे....
@ बलबीर राणा 'अडिग'