मंगलवार, 15 सितंबर 2026

चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे,


चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे,

हौले-हौले, घनेरे-सनेरे।

नयन-नक्श, वक्त बसेरे,

हेर-फेर होते सांझ-सबेरे...


जो बीता, वही गीता,

आगे क्या? सब रीता।

सुख भोगा, दुःख झेला,

कुछ हारे, कुछ जीता।

उकाळ उंदार संग चलेरे।


चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे...


धूप-छाँव, काँव-काँव,

ना जानी चाल, ना दाँव।

बजते-बजाते, धै-धध्याते,

बढ़ते रहे, डग मिला पाँव।

सौजि-सौजी, धीरे-धीरे।


चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे....


हार-जीत, जीवन-गीत,

थोड़ी-सी कम, बड़ी धीत।

जतन जगाते, ठौर ठैराते,

रचते रहे जीवन-संगीत।

घुघता-घुघती, घुर्र-घुर्र,

खुले रहे, मन-ज्यू के डेरे।


चेहरों के घेरे, उम्र के फेरे....


@ बलबीर राणा 'अडिग'