गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

कष्ट हरेंगे मेरे नाम


घडी दो भज लो हरी का नाम
दुःख हरेंगे मेरे राम
कुछ पल हो जाओ अंतर्ध्यान
सब कष्ठ हरेंगे मेरे राम

अपने पराये के भेद ने
दुर्ग मनुष्यता का ढहाया है
खुद के बोये काँटों में
जीवन शूलों में हमने गुजारा है

अभी भी वक्त है
ले लें संभलने का नाम
सब दुःख हरेंगे मेरे राम

घडी दो .........................

उम्र भर हाय तोबा में ही
जीवन का मोल हम भूल गए
अहंकार की मंजिलें सजा सजा
खुद को तोलना भूल गए

पता न चलेगा
कब ढल जाए जीवन की शाम
सब दुःख हरेंगे मेरे राम

घडी दो .........................

बुरे कर्मों के बुरे समय में
कोई न कहेगा तुझे अपना
धरती में होकर क्यों देखता है
आसमान का झूटा सपना

सतकर्मों से सद्गति का
यहीं है मोक्ष धाम...
सब कष्ट हरेंगे मेरे राम

घडी दो .........................

जै राम, श्रीराम जय जय राम
हरी नाम श्रीराम जय जय राम
घडी दो भज लो हरी का नाम
दुःख हरेंगे मेरे राम
पल हर पल हो जाओ अंतर्ध्यान
सारे कष्ठ हरेंगे मेरे राम
जै राम, श्रीराम जय जय राम ............

4 अक्टूबर 2013
रचना : बलबीर राणा “अडिग”

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर और सामयिक प्रस्तुति।
श्री राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।