शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

चौमास में



चौमास में निखरता है पहाड़
चौमास में बिखरता है पहाड़
चौमास में ही मनभावन होता
चौमास में ही उजड़ता है पहाड़

सुख-समृद्धि के उत्सव भतेरे हैं
आपदाओं के सघन घनेरे हैं
विकास की जद में आ गया जो
इस लिए कहीं भी दड़कता है पहाड़
चौमास में निखरता है पहाड़.....

बादलों को बिकरालता भा रही
रिमझिम रुनझुनता नहीं सुहा रही
फटाक कहीं भी फट पड़ने से
विनाश-त्रास से तड़फता है पहाड़
चौमास में निखरता है पहाड़.....

दहाड़ मार रोना, सिसकना, सहना
नित बाजीगरों की बाजियों में हारना
छाती बने डामों से डमता जा रहा
दुधारू गाय समझ दुहता है पहाड़
चौमास में निखरता है पहाड़.....

चौमास - वर्षा ऋतु
29 अगस्त 25 
@ बलबीर सिंह राणा 'अडिग' 

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